हिंदू खतरे में है ??
नारा उछाला जा रहा है कि #हिंदू खतरे में है? नारा उछालने वाले हिंदू हैं। मान लीजिए हिंदू खतरे में हैं। लेकिन, ऐसा क्या हो गया कि हिंदू डरा हुआ है?
वही हिंदू, सिकंदर के सिंध हमले पर खतरे में नहीं था। 8वीं सदी में।अरबों के आक्रमण और कश्मीर में ब्राह्मणों के मुस्लिम बनने पर हिंदू खतरे में नहीं था। लुटेरे गौरी और गजनी ने जब हमले किए और सोमनाथ को लूटा, तब हिंदू खतरे में नहीं था। एक के बाद एक मुस्लिम शासकों - गुलाम वंश, खिलजी, तुगलक और मुगल - ने सैंकड़ों साल भारत पर राज किया, तब हिंदू खतरे में नहीं था। कश्मीर से कन्याकुमारी तक मुस्लिम शासक के अधिनस्थ हिंदू शासकों की लंबी फेहरिस्त के बावजूद हिंदू खतरे में नहीं था।
#अमृतलाल में हिंदू खतरे में है। लेकिन प्रोब्लम यह है कि हिंदुओं को यह खतरा दिखाई नहीं दे रहा है।
इस देश में कोई भी आक्रमणकारी, लुटेरा या विधर्मी शासक आया, उन्होंने सवर्णों को अपनी सत्ता की धुरी और लाभार्थी बनाया। शासक कोई भी रहा, कोई न कोई मानसिंह, बीरबल, तानसेन और टोडरमल जैसे सभी सवर्णों की पांचों उंगलियां घी में और सिर कढ़ाई में रहा। इन सवर्णों के बूते पर भारत को गुलाम बनाने वाले इन लुटेरों, राजाओं और सम्राट ने भारत में सर्वव्यापी #छुआछूत और #सामाजिक_बहिष्कार के ढांचे को सवर्णों के मनमाफिक रहने दिया। यह गुलाम राजे - रजवाड़े, चाटुकार सवर्ण बुद्धिजीवी, तोंदवाले सवर्ण व्यापारी, और सवर्ण मसखरे और संगीतकारों को क्या फर्क पड़ा, जो तब हिंदू खतरे में होता?
#सवर्ण आज गुलाम नहीं हैं। आज सत्ता पूरी तरह उनके हाथ में हैं। वह राम मंदिर बना रहे हैं। वह उत्तर प्रदेश में दिवाली के मौके पर अयोध्या में भगवान राम के लिए लाखों घी या तेल के दिए पिछले कई सालों से प्रज्वलित कर रहे हैं। उन्होंने काशी में भगवान विश्वनाथ के मंदिर का जीर्णोद्धार कर उसे पर्यटन स्थल बना दिया है। मध्य प्रदेश में भगवान महाकाल के मंदिर से नेपाल के प्रधानमंत्री की सफल यात्रा का जश्न बना चुके हैं। दुनियाभर को भारत की मंदिर संस्कृति सम्मान के साथ परोस रहे हैं। मथुरा में भगवान कृष्ण की निर्विघ्न पूजा का उपक्रम शुरू हो चुका है। इतना सब कुछ सवर्णों के मनमाफिक होने के बाद भी हिंदू खतरे में हैं?
केंद्र और राज्य सरकार की नौकरशाही पर उनका निर्विवादित नियंत्रण है। कार्यपालिका, पुलिस, मिलिट्री, पैरा मिलिट्री, न्यायपालिका, अखबार, चैनल और मीडिया, उद्योग, व्यापार, बैंक, इंस्योरेंस, स्टॉक मार्केट और बाजार सभी पर तो सवर्णों का पूर्ण कब्जा है। ऐसा भयंकर कब्जा तो उनका सम्राट अशोक, अर्थशास्त्री "कौटिल्य", और अकबर के जमाने में भी नहीं था। फिर भी हिंदू खतरे में है?
पर, हिंदू खतरे में तो है।
हिंदुओं के खतरे का असली कारण जानना है, तो पहले आपको "हिंदू प्रोजेक्ट" को जानना पड़ेगा। इस "हिंदू प्रोजेक्ट" का इस्लामकालीन शासकों के हिंदोस्तान या हिंदुस्तान से कोई लेना देना नहीं है। उस हिंदोस्तन में हिंदू होते, तो वह कह सकता था कि राजा मुस्लिम है, और प्रजा हिंदू, इसलिए हिंदू खतरे में है। लेकिन अंग्रेजों से लड़ने वाले सारे सवर्ण राजाओं, मनसबदारों और सामंतों ने तो मुस्लिम बहादुरशाह जफर को अपना सम्राट माना। इसका अर्थ है कि हिंदू मुस्लिम शासक के राज में खुद को खतरे में नहीं मानता था।
फिर हिंदू क्यों खतरे में है?
असल में हिंदू खतरे में का नारा इसलिए है क्योंकि सवर्णों का "हिंदू प्रोजेक्ट" खतरे में है। 20वीं शताब्दी में, जब ब्रिटिश शासकों ने यह तय किया कि वह प्रशासन का लोकतंत्रीकरण करेंगे, यानि देर सबेर, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के शब्दों में, "तेली, तमोली, कुनबी, मराठे" शासन में जायेंगे, तो सत्ता और उसके लाभार्थी सवर्णों को एकाधिकार पर खतरा मंडराता नजर आया। हजारों सालों से जो चमार, महार, परैया, तेली, तमोली, मराठे, जाट, अहीर, गूजर और कुर्मी शास्त्र, पुराण और स्मृतियों के बूते पर दिमागी गुलाम थे, देर सबेर सत्ता उनकी होने वाली थी। क्या मौजूदा प्रधानमंत्री इस बात का सबूत नहीं? सदियों से समाज के भाग्य नियंताओं को इसका एक ही तोड़ नजर आया है। वह तोड़ है "हिंदू प्रोजेक्ट"।
यह "हिंदू प्रोजेक्ट" क्या है?
सिंपल वैरी सिंपल।
"शूद्र" जातियों को भटका कर, बरगला कर सवर्ण सत्ता को कायम रखना ही "हिंदू प्रोजेक्ट" है। शूद्रों, दलितों और आदिवासियों को उनकी संस्कृति, उत्पीड़न, शोषण और अत्याचार को भुलवाना और मीठी मीठी बातों से पटाना ही "हिंदू प्रोजेक्ट" है। चूंकि अशोक भारती, राजकुमार भाटी, सूरज मंडल, नितिन चौधरी जैसे लोग इस प्रोजेक्ट को साफ साफ समझ रहे हैं और अपने लोगों को समझा रहे हैं कि इस प्रोजेक्ट के झांसे में मत आओ। इसलिए सवर्ण कह रहे हैं:
हिंदू खतरे में हैं।